कम वर्षा वाले कबीरधाम में पानी की खेती : जल संरक्षण-संवर्धन के क्षेत्र में हुए अनेक काम: नहरों को मिला जीवनदान

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(रायपुर) मैकल पर्वत श्रेणी के तलहटी पर बसे कम वर्षा वाले आदिवासी बैगा बहुल कबीरधाम जिले को अकाल-दुकाल से बचाने पानी की खेती शुरू की गई है। इसके लिए पिछले दो वर्षो से भूमिगत जलस्रोतों को बढ़ाने के लिए प्राथमिकता से किये जा रहे कई छोटे-छोटे काम महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। इन कार्यों को महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना से जोड़ते हुए ग्रामीणों के लिए रोजगार की व्यवस्था भी की गई है। इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं।
    

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की विशेष पहल पर छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और संवर्धन के कई कार्य राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी के माध्यम से किये जा रहे हैं। कबीरधाम जिला कम वर्षा वाले जिले के रूप में चिन्हांकित है। पर्वत पहाड़ों से घिरे होने के बावजूद इस जिले में औसतन कम बारिश होती है। पिछले दो वर्षो में 3 हजार 285 तालाब, कुंआ, डबरी और नया तालाब के काम यहां पर्याप्त जल स्तर बनाए रखने में कारगर साबित हुए हैं। यहां बरसात के पानी को एकत्र करने तीन हजार से अधिक तालाब निर्माण, तलाब गहरीकरण, कुआं निर्माण, डबरी निर्माण और प्राकृतिक जल स्त्रोंतों को पुर्नजीवित करने के साथ साफ पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए झिरिया का पक्कीकरण कर उसे मजबूत किया गया है।

पिछले दो वर्षो में 301 नए तालाबों का निर्माण किया गया है। 1061 पुराने तलाबों का गहरीकरण कर जल क्षमता भराव को बढ़ाने का काम किया गया है। वनांचल क्षेत्रों में वनवासियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 60 से अधिक झीरिया का जीर्णोद्धार किया गया है। पिछले वर्ष औसत से अच्छी बारिश की वजह से जिले के पांच मध्यम जलाशयों में जल भराव की स्थिति अब पहले से बेहतर हो गयी है। समुचित जल भराव की लगभग ऐसी ही स्थिति जिले के 101 लघु जलाशयों में भी है।छोटे-छोटे जल संवर्धन और भूमिगत जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित करने वाले काम कबीरधाम की धरती में नमी और जल स्तर को बढ़ाने कारगर साबित हो रहे हैं।

ग्रामीण अंचलों में कुंआ, डबरी, झीरिया जैसे परंपरागत जल श्रोतो के जीर्णोद्धार से जहां एक ओर ग्रामीणों के लिए पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था हो सकी है, वहीं ग्रामीणों को लगातार रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2018-19 से लगातार मरनेगा के तहत मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के ऐसे कार्यो को प्राथमिकता के आधार पर कराया जा रहा है। नौ सौ से अधिक डबरी निर्माण के कार्य सभी विकासखण्ड में स्वीकृत किए गए है। इसी तरह 850 से अधिक कुंआ निर्माण के कार्य जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों की मांग पर स्वीकृत किए गए हैं।
  

 छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास का आधार कृषि है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए सुराजी गांव योजना के तहत नरवा, गरवा, घुरवा अउ बारी पर अधिक जोर दिया। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के माध्यम से जिले में 6 करोड़ 48 लाख 75 हजार रूपए की लागत से सिंचाई क्षमता बढ़ाने और सिंचाई संसाधनों के मरम्मत, रख-रखाव के लिए लगभग 49 काम किए गए।

पिछले कई वर्षो में मरम्मत, रख-रखाव के अभाव में जीर्ण-शीर्ण और क्षतिग्रस्त हो चुके सिचाईं संसाधनों में मनरेगा योजना से सुधार किये जा रहे हैं, वहीं आवश्यकता अनुसार बांध, नहर, प्रणाली में आवश्यक सुधार और मरम्मत के भी काम किये जा रहे हैं।  इन सभी कामों के पूरा होने से 2 हजार 779 हेक्टेयर में भरपूर सिंचाई होगी। किसानों को समय पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी और सिंचित क्षेत्रों के ली जाने वाली फसल के रकबे में बढोत्तरी भी होगी।

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