अंतरवर्तीय सब्जी की खेती से समूह की महिलाओं को मिली आत्मनिर्भता की नई राह

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(रायपुुर) छत्तीसगढ़ में किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से नए-नए तरीकों से सब्जी तथा फसल लगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी कड़ी में सरगुजा जिले की स्व सहायता समूह महिलाएं इंटरक्रॉप फसल के तहत सब्जियों की खेती को आत्मनिर्भता की नई राह के रूप में चुनी हैं। अलग-अलग प्रकार के सब्जियों की खेती से महिलाएं अच्छी मुनाफा कमा रही हैं और आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।
  

 कोसा बीज केंद्र अंबिकापुर में 11 सदस्यीय महिला समूह के द्वारा लगभग एक हेक्टेयर के क्षेत्र में साग-सब्जियों की इंटरक्रॉप फसल ली जा रही है। कोसा बीज केंद्र में रेशम कीट पालन के लिए लगाए गए साजा एवं अर्जुन वृक्षों के बीच खाली जगहों का सदुपयोग कर महिला कृषकों ने साग-सब्जी की खेती करना प्रारंभ किया है। इन खाली जगहों में आलू, भिंडी, बरबट्टी, प्याज, टमाटर, बैंगन, मूंग, भुट्टा आदि की अंतरवर्तीय फसल ली जा रही है। साग-सब्जी की खेती से महिलाएं लगभग 50 हजार रुपये की आय अर्जित कर चुकी हैं। रेशम उत्पादन के साथ ही यहां सब्जी की अंतरवर्तीय खेती की अभिनव पहल की गई है। समूह की महिलाएं घरेलू कार्यों के साथ यहां सब्जी की खेती कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर हो रहा है। अब उन्हें अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए दूसरों पर आश्रित नही रहना पड़ता। लॉकडाउन की अवधि में सब्जी की खेती से उन्हें आर्थिक मदद मिली है।
    

रेशम विभाग उप संचालक ने बताया कि विभाग ने रेशम कीट पालन के लिए लगाए गए वृक्षों के बीच के खाली जमीन के सदुपयोग के लिए महिलाओं को इंटरक्रॉप सब्जी की खेती प्रोत्साहित किया गया। समूह की महिलाएं यहां विभिन्न प्रकार के सब्जी की खेती कर मुनाफा कमा रही हैं। सदस्य श्रीमती सुमित्रा बाई ने बताया कि यहां सब्जी की अच्छी पैदावार होती है। सबसे अच्छी बात यह है कि यहां ज्यादा देखरेख नहीं करना पड़ता। सदस्य कल्कि ने बताया सब्जी को मार्केट में बेचने पर हमें अच्छा मुनाफा होता है।

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