गोमय दीपक अभियान मैं गोबर से उद्योग स्थापित करने की बात चली

0
5


राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष डॉक्टर बल्लभभाई कथीरिया और समस्त महाजन के मैनेजिंग ट्रस्टी गिरीश जयंतीलाल शाह के व्याख्यान से लोग अत्यंत प्रभावित हुए

अहमदाबाद (गुजरात) ; 5 नवंबर 2020 : डॉ. आर. बी. चौधरी

भारत सरकार के अधीन कार्यरत राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष डॉ वल्लभभाई कथीरिया तथा राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता स्वयंसेवी संस्था समस्त महाजन के मैनेजिंग ट्रस्टी गिरीश जयंतीलाल शाह गौशालाओं के स्वाबलंबन पर नित नए नए अनुसंधान करने और गौशालाओं को वैज्ञानिक विधि से चलाने की देशभर में युक्ति बता रहे हैं । राष्ट्रीय कामधेनु आयोग वर्तमान में गोमय दीपक बनाने का अभियान चला रहा है तो दूसरी तरफ गिरीश जयंतीलाल शाह गोबर के बेहतर उपयोग के लिए गांव , गोचर, गौशाला, गोबर -गोमूत्र, जल , जमीन और वृक्षारोपण की भूमिका को सिद्ध करने के लिए कई राज्यों में सफल प्रयोग करने में लगे हैं । वेबनार संगोष्ठी में आज हुई चर्चा का विषय था गोबर का बेहतर उपयोग और उससे अतिरिक्त कमाई । दोनों विशेषज्ञों ने अपने संवाद में गोबर उपयोग के कई अभिनव प्रयोग बताएं जिसे लोग मंत्रमुग्ध सुनते रहे ।

आज की व्याख्यान की शुरुआत गो बंदना से चालू हुई और उसके तत्काल बाद राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष डॉक्टर बल्लभ भाई कथीरिया ने बताया कि पूरे देश में बड़े ही जोर -शोर के साथ चलाया जा रहा गोमय दीपक अभियान पूरे देश में शहर से स्वीकार किया गया है और अब तक कुल 85 वेबनार संगोष्ठी आयोजित की जा चुकी है जिसमें भारत के साथ-साथ अमेरिका ,यूनाइटेड किंगडम आदि देशों के प्रतिभागी शामिल हुए । डॉक्टर कथीरिया ने कहां की गोबर से मूर्तियां बनाने का कार्यक्रम जिस कदर सफल हुआ उसके सफलता का परिणाम आज प्राप्त हो रहा है । अब गोमय दीपक अभियान अपने गंतव्य -शुभ दिवाली तक पहुंचने के बाद गोपाष्टमी और गोवर्धन पूजा अग्रसर होगा । राष्ट्रीय कामधेनु आयोगका निरंतर प्रयास है कि गोबर प्रयोग के नित्य नए-नए ऐसे प्रयोग किए जाएं जिनसे गौशालाओं की आमदनी बढ़ने के साथ-साथ आम आदमी को व्यवसाय तथा रोटी रोजी का साधन मिले ताकि यह बहुत ही जल्दी गोमय उद्योग के रूप में विकसित हो । यह भी अन्य औद्योगिक क्षेत्रों की भांति काऊ इंडस्ट्री जोन या काऊ इंडस्ट्री एरिया घोषित किया जा सके जहां गो आधारित राज्य सामानों की उत्पादन,बिक्री ,पैकेजिंग,ब्रांडिंग एवं निर्यात का कार्य किया जाए । काऊ प्रोडक्ट इंडस्ट्री इतनी विकसित हो कि उसकी ट्रेनिंग, शिक्षा,विपणन,उत्पादन,अनुसंधान, विकास,पैकेजिंग,ब्रांडिंग आदि का व्यापक नॉलेज चेन मौजूद हो जिसको भारतीय संस्कृति,परंपराओं और पारिस्थितिकी को मद्देनजर रखते हुए संचालित किया जाए । ऐसी व्यवस्था में आईआईटी,फार्मास्यूटिकल कंपनीज से लेकर भारतीय अध्यात्म के ज्ञान की पुट शामिल रहे तो देश अपने आप आत्मनिर्भर हो जाएगा । वोकल फॉर लोकल या मेक इंडिया – मेड इंडिया का सपना अपने आप साकार हो जाएगा ।

डॉक्टर बल्लभ भाई कठेरिया के व्याख्यान के बाद राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता संस्था समस्त महाजन के मैनेजिंग ट्रस्टी गिरीश जयंतीलाल शाह ने बताया कि गोमय दीपक को प्रज्वलित करने का अभियान देश के कोने-कोने में गूंज रहा है और अब 11 करोड़ दीपक बनाने का लक्ष्य 30-40 करोड़ दीपक के लक्ष्य को भी पार कर जाएगा । शाह ने बताया कि जहां एक और यह अभियान जारी रहना चाहिए वहीं पर गोबर के दूसरे महत्वपूर्ण उपयोग के बारे में भी साथ-साथ विचार करना चाहिए क्योंकि पूरे देश की मिट्टी जीवांश खाद की अनुपस्थिति में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के निरंतर प्रयोग से मिट्टी और पानी जहरीली हो गई है । हर किसी को शुद्ध पौष्टिक स्वादिष्ट और स्वस्थ खाद्यान्न प्राप्त करना दिनों दिन मुश्किल होता जा रहा है । ऐसी विकट स्थिति में यह जरूरी है कि हम देशभर के मवेशियों के गोबर का बेहतर प्रयोग करें और उसे खेत में भी डालने का योजना बनाएं ताकि मिट्टी की कुदरती अवस्था कोवापस लाया जा सके । शाह ने यह भी बताया कि दुनिया भर में भारत के मवेशियों की चर्चा की जाती है और कई बार लोग कहते हैं मवेशियों की संख्या अत्यधिक है । शाह ने बताया कि भारत में मवेशी अधिक नहीं है बल्कि मवेशी कम है। देश के हर गांव में मवेशी है तो तो यह मानना होगा कि एक भी गौशाला है अर्थात गौशालाओं की संख्या 6लाख है से ऊपर। हमारे पास जब पर्याप्त पशु रहेंगे तो पर्याप्त गोबर पैदा होगाजो सीधे खेत में जाएगा । अगर ऐसा हुआ तो रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता खत्म हो जाएगी और हमें शुद्ध एवं पौष्टिक भोजन मिलेगा । साथ ही साथ पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगी । उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपना अनुरोध करते हुए कहा कि देश के हर गांव में एक गौशाला के निर्माण के लिए अगर एक करोड़ रुपया दिया जाए तो भारत की खेती में एक आमूलचूल परिवर्तन आ जाएगा । जीवन भर अपना योगदान देने वाली गाय कत्लखाने नहीं जाएगी क्योंकि उसका सबसे अमूल्य उत्पाद गोबर है । शाह ने अपने प्रस्तुति में सभी से अनुरोध किया कि गांव , गोचर, गौशाला, गोबर -गोमूत्र, जल , जमीन और वृक्षारोपण की भूमिका को गहराई से समझे और गोबर बेहतर प्रयोग करें । इसी में सबकी भलाई है ।

वेबीनार संगोष्ठी का मनमोहक संचालन कर रहे थे भारतीय जन कल्याण बोर्ड के प्रतिनिधि मित्तल खेतानी जोवक्ताओं के परिचय देने से लेकर परिचर्चा के विषय की पृष्ठभूमि बताते हुए राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के गोमय दीपक अभियान की तरोताजा स्थिति भी बता रहे थे । राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के तरफ से पुरीस कुमार वेबनार संगोष्ठी की उपलब्धियां बताइ और कहा कि यह अभियान तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है ।


LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here