दलहनी-तिलहनी फसलों के खेतों से जल निकास की व्यवस्था करें : कृषकों को सम-सामयिक सलाह

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(रायपुर) राज्य में लगातार हो रही बारिश के मद्देनजर कृषि विभाग द्वारा किसानों को खरीफ फसलों की निरंतर निगरानी की सलाह दी गई है। कृषि विभाग ने दलहनी एवं तिलहनी फसलों के खेतों में पानी का जमाव न होने देने के लिए जल निकास की व्यवस्था सुनिश्चित करने की समझाईश दी है। लगातार बारिश एवं बदली को देखते हुए किसानों को खरीफ फसलों में किसी भी प्रकार के उर्वरक एवं कीटनाशक का छिड़काव नहीं करने को कहा है।

मौसम खुलने के बाद प्रति एकड़ 10 किलो पोटाश का छिड़काव करने तथा उसके दो दिन के बाद यूरिया अथवा अन्य उर्वरक का छिड़काव करने को कहा है। किसानों से अपील की गई है कि वे फसलों की निगरानी करें और किसी भी प्रकार की कीट-व्याधि का प्रकोप दिखाई देने पर इसकी तत्काल सूचना अपने इलाके के सहायक कृषि विस्तार अधिकारी अथवा कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक को दें और उनकी सलाह के अनुसार अनुशंसित कीटनाशक का निर्धारित मात्रा में उपयोग करें।
    

पौधों की वृद्धि एवं विकास के लिए कुल 16 तत्व आश्वक होते हैं। इनमें से तीन प्राथमिक तत्व कार्बन, हाईड्रोजन व ऑक्सीजन है। तीन मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन, स्फूर व पोटाश हैं। तीन गौण तत्व कैल्शियम, मैग्निशियम व सल्फर है। अन्य सात सूक्ष्म तत्व लोहा, जस्ता, कापर, बोरान, मैग्नीज, कोबाल्ट व नीकल हैं जो पौधों के लिए अनिवार्य है। विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में ली जाने वाले फसलों हेतु आवश्यकतानुसार पोषण तत्वों की जानकारी मिट्टी परीक्षण के जरिए ही प्राप्त होती है। धान की फसल में खैरा नामक रोग जिंक तत्व की कमी से होता है। खैरा रोग की रोकथाम के लिए प्रति एकड़ 10 किलो जिंक सल्फेट के छिड़काव करना चाहिए।
    

कृषि विभाग ने किसानों को संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दिए गए अनुशंसा के अनुरूप करने की सलाह दी है। सामान्यतः मिट्टी परीक्षण का परिणाम तत्वों की उपलब्धता अति अल्प, कम, मध्यम एवं उच्च में दिया जाता है। तत्व की उपलब्धता का प्रणाम अति अल्प होने की स्थिति में फसलों के लिए उर्वरक की अनुशंसित मात्रा का डेढ़ गुना उपयोग किया जाना चाहिए। तत्व की उपलब्धता कम होने की स्थिति में उर्वरक की अनुशंसित मात्रा से सवा गुना तथा मध्यम होने की स्थिति में अनुशंसित मात्रा के बराबर व उच्च होने की स्थिति में उर्वरक की अनुशंसित मात्रा का आधा ही उपयोग करना चाहिए। मिट्टी की अम्लीयता एवं क्षारियता पी.एच. में मापी जाती है।

मिट्टी का पी.एच. मान 7 से कम होने पर अम्लीय तथा पी.एच. 7 से अधिक होने पर क्षारीय माना जाता है। अम्लीय मिट्टी में प्रति हेक्टेयर 2-2.5 टन चूना का उपयोग तथा क्षारीय भूमि में 2.5 क्विंटल जिप्सम प्रति हेक्टेयर करना लाभप्रद होता है।

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