किसानों का संघर्ष राजनैतिक नहीं, खेती कानूनों का विरोध न करने वाले पंजाब के भविष्य को खतरे में डाल देंगे – कैप्टन अमरिन्दर सिंह

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(चंडीगढ़) पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आज कहा कि संघर्षशील किसानों के परिवारों को हर संभव मदद मुहैया करवाई जायेगी। इसके साथ ही उन्होंने अकालियों और आम आदमी पार्टी को खेती कानूनों के मुद्दे पर संकुचित राजनीति न खेलने के लिए कहा क्योंकि यह मसला राजनैतिक नहीं बल्कि पंजाब और यहाँ के बच्चों के भविष्य के साथ संबंध रखता है।

फेसबुक प्रोग्राम ‘कैप्टन से सवाल’ की 19वीं लड़ी के दौरान लोगों से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘यह मसला राजनैतिक नहीं है बल्कि यह हमारे पंजाब, हमारी कृषि और हमारे बच्चों के भविष्य के साथ जुड़ा हुआ है। यदि हम काले खेती कानूनों का विरोध नहीं करते तो हम अपने बच्चों का भविष्य खतरे में डाल देंगे।’’

मुख्यमंत्री ने सभी को किसानों के आंदोलन पर राजनीति न करने की अपील करते हुए कहा कि ये किसान पिछले 28 दिनों से दिल्ली की सरहदों पर संघर्ष करते हुए कड़ाके की ठंड की मार से जूझ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल को खेती कानूनों के मुद्दे पर स्पष्ट तौर पर किसान के हक में उतरने का न्योता दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह किसानों के साथ एकजुटता प्रकट करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में न जाने का फैसला सोच समझकर लिया। प्रदर्शनकारी किसानों के पास उनके द्वारा न जाने बारे सोशल मीडिया पर उठे सवालों के जवाब में कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि उन्होंने किसानों की भावनाओं का सत्कार करते हुए ऐसा किया है क्योंकि किसान स्पष्ट तौर पर कह चुके हैं कि वह किसी भी राजनैतिक पक्ष का सम्मिलन नहीं चाहते।

कड़ाके की ठंड के बीच किसानों को अपना ख़्याल रखने की अपील करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने उनको पंजाब में अपने पारिवारिक सदस्यों के लिए किसी तरह की आपातकालीन मदद के लिए 1091 हेल्पलाइन या 112 पुलिस हेल्पलाइन पर कॉल करने के लिए कहा। किसानों के चल रहे संघर्ष के दौरान 22 किसानों की मृत्यु हो जाने पर चिंता ज़ाहिर करते हुए मुख्यमंत्री ने ईश्वर के समक्ष अरदास की कि केंद्र सरकार द्वारा मसला जल्द सुलझाया जाये। शांता कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक न्यूनतम समर्थन मूल्य की प्रणाली और एफ.सी.आई. खरीद के मॉडल का अंत हो जाने बारे किसानों की आशंकाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘गेंद अब केंद्र के पाले में है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यदि एफ.सी.आई. को ख़त्म कर दिया गया तो अनाज कौन खऱीदेगा? उन्होंने कहा कि इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली का ख़ात्मा हो जायेगा तो फिर गरीब को रोटी कौन देगा?’’

इस मुद्दे पर दोनों विपक्षी दलों द्वारा बार-बार यूटर्न लेने पर चुटकी लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब केंद्र सरकार सबसे पहले खेती ऑर्डीनैंस लेकर आई थी तो इसको केंद्रीय मंत्रीमंडल के मैंबर होने के नाते हरसिमरत कौर बादल का पूर्ण समर्थन था। जब उन्होंने (कैप्टन अमरिन्दर सिंह) इस मसले पर तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाई थी तो शिरोमणि अकाली दल ने कच्चा-पक्का सा स्टैंड लिया और यहाँ तक कि खेती कानूनों के हक में बोले। उन्होंने कहा कि यही बस नहीं बल्कि प्रकाश सिंह बादल ने भी ऑर्डीनैंसों का पक्ष लिया था। उन्होंने कहा कि उस समय अकाली विधानसभा सत्र का बॉयकाट कर गए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर पूरी तरह विफल हो जाने के बाद अकालियों ने अपना सुर बदला और विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान किसानों के समर्थन में आगे आए थे।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि जहाँ तक आप का सवाल है, इसने भी खेती कानूनों के विरुद्ध राज्य सरकार के स्टैंड की हिमायत की थी और यहाँ तक कि राज्य के खेती संशोधन कानून की कॉपियां और विधानसभा का प्रस्ताव राज्यपाल को सौंपने के लिए इनके नेता उनके और पंजाब कांग्रेस के नेताओं के साथ चलकर गए थे। हालाँकि, उसके अगले दिन ही इन्होंने अपने पैर पीछे खींच लिए जिससे इस मुद्दे पर इनका दोगला किरदार नंगा हो गया।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि खेती कानूनों बारे फ़ैसला किसी भी ऐसी समिति में नहीं किया गया जिसका पंजाब मैंबर हो। उन्होंने कहा, ‘‘अरविन्द केजरीवाल, सुखबीर बादल, भगवंत मान, सभी ही झूठ बोलने के साथ-साथ राजनीति खेल रहे हैं। इनको पूछो कि वह झूठ क्यों बोल रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने अपने संकुचित हितों के लिए झूठा प्रचार फैलाया हुआ है।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि सत्य यह है कि खेती सुधारों को विचारने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से कायम की गई समिति के आरंभ में पंजाब इसका मैंबर नहीं था और उनके  द्वारा केंद्र को पत्र लिखने के बाद ही पंजाब को समिति का हिस्सा बनाया गया। इसके बाद समिति की दो मीटिंगें हुईं जिनमें से एक मीटिंग वित्त के साथ सम्बन्धित थी जिसमें मनप्रीत बादल ने शिरकत की थी जबकि दूसरी मीटिंग में सिफऱ् अफसरों को बुलाया गया था और उनके साथ एक मसौदा साझा किया गया जिसमें इन कानूनों का कोई जि़क्र नहीं था। उनकी सरकार ने तुरंत हरकत में आते हुए मसौदे में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए सुझावों पर आपत्ति प्रकट की और स्पष्ट स्टैंड लिया कि एम.एस.पी. के साथ किसी भी कीमत पर छेड़छाड़ न की जाये। उन्होंने आगे कहा कि उनकी सरकार ने यह भी माँग की थी कि एक खरीद प्रणाली विकसित की जाये ताकि केंद्र सरकार द्वारा घोषित एम.एस.पी दरों पर दालों, कपास, मक्का और अन्य फसलों की खरीद हो सके।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा नये खेती कानूनों के द्वारा आढ़तियों के लंबे समय से चले आ रहे सभ्यक प्रबंधन को तबाह करने की कोशिश किये जाने की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘‘आप किसानों और आढ़तियों के रिश्ते को तोडऩे में क्यों लगे हुए हो।’’ उन्होंने आगे बताया कि यही कारण है जिसने किसानों को परेशान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा प्रणाली के अंतर्गत भी किसानों से सीधे तौर पर खरीद करने की किसी को कोई मनाही नहीं है और इसी पक्ष को केंद्र सरकार द्वारा नये कानूनों के अंतर्गत बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आशंका ज़ाहिर की कि नये कानूनों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को बहुत बड़ा नुकसान पहुँचेगा, जिनका विकास मौजूदा प्रणाली के अंतर्गत मंडी बोर्ड को होने वाली आय से किया जाता है।

किसानों के साथ किये जा रहे व्यवहार पर रोष जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के किसानों ने कड़ी मेहनत करके भारत को अनाज के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया और मुल्क का 2 प्रतिशत होने के बावजूद अनाज भंडार में 40 प्रतिशत का योगदान दिया। उन्होंने केंद्र सरकार को मुल्क और कृषि आधारित आर्थिकता के बड़े हित देखते हुए नये कानून तुरंत ही रद्द करने की अपील की।

संगरूर के एक निवासी द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार द्वारा किसान संघर्ष के दौरान अपनी जान गंवाने वाले प्रत्येक किसान के परिवार को 5 लाख रुपए दिए जा रहे हैं और ज़रूरत अनुसार और भी मदद की जायेगी।

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