धान फसल में माहो के नियंत्रण के लिए कृषकों को सलाह

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(रायपुर) इस वर्ष चालू खरीफ में पर्याप्त बारिश होने से धान की अच्छी पैदावार होने की संभावना है, परन्तु कुछ दिनों एवं सप्ताह से जिले में बेमौसम वर्षा एवं खराब मौसम के कारण से फसल में कीट व्याधि एवं बीमारियों का प्रकोप अधिक होने की शिकायत देखी जा रही हैं। खराब मौसम एवं नमी वाले मौसम कीट के फैलाव के लिए अनुकूल है। इसलिए फसल में कीट व्याधि एवं बीमारियों का समय में रोकथाम किया जाना अति आवश्यक है। राज्य में 37 लाख हेक्टेयर में धान की फसल ली गई है। जिसमें किसानों के द्वारा शीघ्र पकने वाली हरूना किस्म, मध्यम अवधि में पकने वाली एवं देर से पकने वाली धान की फसले बोई गई है। हरूना किस्म के धान फसल में बालियां लग गई है तथा कुछ में बालियां लगने की स्थिति में है। धान की बाली अवस्था में माहो का प्रकोप अधिक होता है, जिसका उचित समय में नियंत्रण नहीं करने पर फसल को पूरी तरह से खराब कर देता है। कृषि विभाग द्वारा धान की फसल को माहों से बचाने के लिए किसान भाईयों को निर्धारित मात्रा में अनुशंसित दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
    

भूरामाहों कीट पौधे के निचली सतह पर तने पर बैठकर रस चूसकर हानि पहुंचाते है। अधिक प्रकोप की स्थिति में जगह-जगह पर गोलाकार जले हुए दिखाई देता है। इससे प्रभावित फसल की पत्तियों में काला धब्बा बन जाता हैं। इसके नियंत्रण के लिए नीम का तेल 2500 पी.पी.एम को 1 लीटर प्रति एकड़ से छिड़काव करें या इमिडाक्लोरोपिड 17.8 एस.एल. की 40-50 मिली लीटर को 200-250 लीटर पानी में घोल तैयार कर प्रति एकड छिड़काव कर सकते हैं।
    

इसी तरह हरामाहों का रंग हरा होता है। यह कीट पत्तियों से रस चुसकर हानि पहुंचाते है। जिसके कारण पत्तियों की नोंक पर पारदर्शी पीले धब्बे पड़ जाते है और पौधा कमजोर पड़ जाता है  तथा बाद में पत्तियों पर काली फफूंद पड़ जाती है। इसके नियंत्रण के लिए क्लोरोपायरिफास 20 ई.सी. की 2 मिली लीटर मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। किसान भाईयों से आग्रह है कि वर्तमान में माहो कीट की प्रकोप की समस्या को देखते हुए अनुशंसित कीटनाशक दवाईयों का छिड़काव करें, ताकि समय में कीट का रोकथाम हो सके तथा अच्छी पैदावार लिया जा सके।