संकेर पहले करते थे परम्परागत खेती, अब कर रहे उन्नत सामूहिक खेती : सरकारी योजना बनी आय बढ़ाने में मददगार

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(रायपुर) किसानों के लिए संचालित राज्य सरकार की योजनाओं का किसान भरपूर लाभ उठा रहे हैं। दूरस्थ और वन क्षेत्रों के किसान भी अब खेती किसानी की उन्नत तकनीकों को अपनाकर लाभान्वित हो रहे हैं। राज्य के वनांचल क्षेत्र के जिला नारायणपुर के ओरछा विकासखंड (अबूझमाड़) का प्रवेश द्वारा कहे जाने वाले ग्राम कुरूषनार के किसान संकेर और उसके बेटे परम्परागत खेती के अलावा अन्य फसल और बाड़ी में सब्जी-भाजी उगाकर अपनी आमदनी में इजाफा कर रहे है।

जिला प्रशासन द्वारा कुरूषनार की 160 एकड़ भूमि में 86 किसानों की आपसी सहमति पर तीन चक बनाकर भूमि का समतलीकरण, डबरी निर्माण और तार फेंसिंग का काम किया गया है। खेती की सिंचाई के लिए 10 ट्यूबवेल और पांच तालाबों का निर्माण भी कराया गया है। यहां का वातावरण और जलवायु हर प्रकार की खेती के लिए उपयुक्त है। किसान औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती कर लाभ कमा रहे है। इसके अलावा आय बढ़ाने के लिए साग-सब्जी और मछली पालन कर अपनी आर्थिक स्थित मजबूत कर रहे है। जिले के किसानों की आय बढ़ाने में सरकारी योजना मददगार साबित हुई है।
  

 किसान संकेर ने बताया कि राज्य शासन द्वारा उनके जीवन यापन हेतु वन भूमि पट्टा प्रदाय किया गया है। उक्त भूमि कृषि योग्य नहीं थी और न ही सिंचाई साधन। इस कारण हम मुश्किल से एक फसल ही ले पाते थे। इस जमीन पर पेंदा खेती करते थे। लेकिन राज्य शासन द्वारा अबूझमाड़िया परिवारों को वन संरक्षण के प्रति प्रेरित करने उनकी आजीविका बढ़ाने एवं कृषि भूमि को बहुफसली बनाने के उद्देश्य से हमर जंगल हमर आजीविका अभियान के तहत् इस इलाके के लगभग 86 किसानों की लगभग 160 एकड़ जमीन की तार फेंसिंग की गई है। जिससे फसलों को मवेशियों के चरने का भी डर खत्म हो गया है और नुकसान से भी बच गये है। उनके खेत में दो टयूबवेल, सौर सिंचाई पम्प के साथ ही मछलीपालन हेतु डबरी का भी निर्माण हुआ है। जिसमें मछलीपालन किया जा रहा है।
    

कृषक संकेर ने बताया कि कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह भी अभी शनिवार को यहां दौरा पर आए थे।यहां की फसलों और बाड़ी को देखकर उन्होंने प्रसन्नता जतायी थी। क्लस्टर में रोपित फलदार पौधों को देखकर उन्होंने और अधिक से अधिक पौधों का रोपण मेड़ों व खाली पड़े भूमि में करने की बात भी कह गये है। प्रशाासन से पूरा सहयोग मिलने को भी कहा है।

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