छत्तीसगढ़ में किसानों की समृद्धि के लिए शुरू हुई लाभकारी फसलों की अंतरवर्तीय खेती

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(रायपुर) मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की मंशानुरूप राज्य में किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से लाभकारी फसलों की अंतरवर्तीय खेती को बढ़ावा देने की मुहिम कृषि विभाग ने शुरू कर दी है। इसकी शुरूआत कोरिया जिले से हुई है। सुराजी गांव योजना के तहत कोरिया जिले के ग्राम दुधनिया और लाई में बाड़ी विकास कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 26 एकड़ रकबे में फलोद्यान ‘मातृवाटिका‘ लगाया गया है। इन दोनों फलोद्यान में अनार, आम, अमरूद, सीताफल और नीबू के उन्नत किस्म के 4160 पौधे लगाए गए हैं। दोनों मातृवाटिका में लगे फलदार पौधो के मध्य 20 एकड़ रकबे में लेमन ग्रास का रोपण किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को फलोद्यान से होने वाली आय के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी मुहैया कराना है।

फलोद्यान ‘‘मातृवाटिका‘‘ में लेमन ग्रास का रोपण लॉकडाउन की अवधि में मार्च और अप्रैल माह में किया गया है। तीन माह बाद जुलाई-अगस्त में लेमन ग्रास की कटाई और इसका आसवन कर आयल निकालने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। जिससे किसानों को अतिरिक्त आय मिलने लगेगी। कृषि विज्ञान केन्द्र सालका बैकुण्ठपुर में पांच सौ किलो क्षमता वाला लेमन ग्रास आयल आसवन प्लांट लगाए जाने की तैयारी भी पूरी कर ली गई है। इस प्लांट के माध्यम से प्रतिदिन दो से तीन चरणों में लगभग 15 सौ किलो लेमन ग्रास की पत्तियों का आसवन कर 8-9 लीटर तेल का उत्पादन किया जा सकेगा, जिसका बाजार मूल्य 20-25 हजार रूपए अनुमानित है।
  

यहां यह उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कृषि विभाग के अधिकारियों को राज्य के किसानों के आय में बढ़ोत्तरी के लिए लाभकारी फसलों की अंतरवर्तीय खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए थे। इसके परिपालन में कृषि विभाग द्वारा प्रारंभिक चरण में कोरियो जिले में इसकी शुरूआत की गई है। कोरिया जिले में 26 एकड़ में विकसित सामूहिक फलोद्यान के मध्य लगभग 24 एकड़ में लेमन ग्रास को रोपण किया जा चुका है। कोरिया जिले के ही ग्राम उमझर, विश्रामपुर, शिवगढ़ और ताराबहरा में 10-10 एकड़ में लेमन ग्रास के रोपण की तैयारी की जा रही है।

कृषि विज्ञान केन्द्र की नर्सरी में लेमन ग्रास के पौधे तैयार कर इसका रोपण आदिवासी कृषकों की पड़त एवं अनुपजाऊ भूमि में विकसित फलोद्यान में किया गया है। कृषि विभाग द्वारा इस कार्यक्रम को वृहद पैमाने पर शुरू करने की तैयारी है। आदिवासी किसानों का समूह बनाया गया है। प्रत्येक समूह में 5-5 कृषक शामिल है। कृषकों को लेमन ग्रास की खेती के लिए विधिवत प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। आदिवासी कृषकों के समूह का फेडरेशन किसान उत्पादक संगठन भी गठित किया जा रहा है। लेमन ग्रास से सुगंधित तेल उत्पादित कर इसके मार्केटिंग की भी कार्ययोजना तैयार की गई है।
  

 कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती मनिंदर कौर द्विवेदी ने बताया कि कोरिया जिले में सुराजी गांव योजना के बाड़ी विकास कार्यक्रम के तहत बड़े पैमाने पर किसानों की बाड़ियों में, खेती की मेड़ो एवं पड़त भूमि पर लेमन ग्रास के रोपण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि लेमन ग्रास को एक बार रोपित कर देने के बाद दो से तीन साल तक उसकी पत्तियों की कटिंग कर आयल निकाला जा सकता है।

उन्हांेने बताया कि फिलहाल 24 एकड़ रकबे में लगभग 4 लाख स्लिप्स का रोपण किया गया है। इसके माध्यम से आगामी वर्ष के लिए लगभग 100 एकड़ रकबे के लिए लेमन ग्रास की स्लिप्स रोपण के लिए उपलब्ध हो सकेगी। 12 एकड़ रकबे से प्रति वर्ष लगभग 500 लीटर सुगंधित लेमन ग्रास आयल प्राप्त होगा। लेमन ग्रास आयल का वर्तमान समय में विक्रय मूल्य दो से तीन हजार रूपए प्रति लीटर है। इस प्रकार 12 एकड़ रकबे में लेमन ग्रास से निकलने वाले तेल से 10 से 15 लाख रूपए तक की अतिरिक्त आमदनी किसानों को होगी। उन्होंने बताया कि लेमन ग्रास की स्लिप्स का विक्रय कर किसान 7 से 8 लाख रूपए तक की और आय अर्जित कर सकेंगे।
    

सुराजी गांव योजना के बाड़ी विकास कार्यक्रम के तहत विकसित की जा रही सामूहिक बाड़ियों की सुरक्षा के लिए मनरेगा और डीएमएफ मद से फैसिंग तथा ड्रिप एरिगेशन की व्यवस्था की गई है। इन बाड़ियों में फलदार पौधों के साथ सब्जी, लेमन ग्रास, खस की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि किसानों को नियमित रूप से आय होती रहे। उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. केशवचन्द्र हंसा एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक रंजित सिंह राजपूत ने बताया कि लेमन ग्रास एवं खस से निकलने वाले सुगंधित आयल का उपयोग कर साबुन, अगरबत्ती, परफ्यूम आदि का निर्माण स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि एक मात्र एक मिलीलीटर लेमन ग्रास आयल अथवा खस आयल का इस्तेमाल कर बेहतर क्वालिटी का एक साबुन बट्टी का निर्माण किया जा सकता है। जिसका बाजार मूल्य 50 से 60 रूपए होगा। इसी तरह अगरबत्ती एवं परफ्यूम के निर्माण में भी लेमन ग्रास और खस के आयल का प्रयोग कर इसकी क्वालिटी को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि लेमन ग्रास आयल से होने वाले मुनाफे को कृषक समूहों के मध्य वितरित किया जाएगा।

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