सवा एकड देसी रवैया बैंगन खेती से 7 लाख रु.मुनाफ़ा,बैंगन की उन्नत खेती

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(महाराष्ट्र) इस व्हिडीओ में श्री.किरण पवार, गांव – लखमापुर, ता.सटाणा, जिला नासिक, महाराष्ट्र इनके सवा एकड खेती में की जाने वाली देसी रवैया बैंगन की सक्सेस स्टोरी को दिखाया गया है | देसी रवैया बैंगन का फ़ल गहरा बैंगनी याने की डार्क पर्पल कलर का है | इसकी शायनिंग और शान दुसरे बैंगन के मुकाबले देखते ही बनती है | आम तौर पें बैंगन को आनेवाले काटों की बात करें तो, इसमें काटे बिलकुल ही नही है | देसी बीज होने के कारण स्वाद भी बहोत ही टेस्टी है | इसी कारण ग्राहक इसको ज्यादा पसंद करते है | श्री.किरण पवार ने 7 बाय 4 फ़िट अंतर पें ये देसी रवैया बैंगन को लगाया है | साथ ही मल्चिंग का उपयोग किया है | पानी देने के लिए टपक सिंचाई का प्रयोग वे करते है |10 मई याने की लॉकडाउन पिरियड में उन्होंने इसकी पौध लगायी |उसके 55 दिन बाद याने की 6 जुलाई को पहिली तुडाई शुरु हुई | और दिसंबर तक इसकी तुडाई शुरु रहेगी | लॉकडाउन होने के कारण ट्रानस्पोर्ट व्यवस्था अभी भी ठिक से शुरु नही है | और व्यापारी भी कम आ रहै है | लेकिन फ़िर भी वे गुजरात के मार्केट में अपना देसी रवैया बैंगन भेजने में सफ़ल हुए है| पिछले अनुभव और इस साल की फ़सल को देखते हुए उनको सवा एकड में 20 टन तक माल निकलेगा | भाव का ऍवरेज रेट 50 रुपये के हिसाब से कुल 10 लाख रुपये बनते है | खर्चा 3 लाख रुपये जोडकर सवा एकड में में ७ लाख रुपये का शुद्ध मुनाफ़ा वो प्राप्त कर सकते है |