शीतल का संशय हुआ दूर, जमीन के मालिकाना हक के लिए आवेदन हुआ मंजूर.

0
35

(रायपुर) गांव और जंगलों के बीच रहकर खुद की अपनी जमीन नहीं होने का दर्द झेलता आया किसान अब सुख-चैन की खेती कर सकेगा। कल तक उनके आंसुओं को न तो कोई पोछने वाला था न ही दर्द पर मरहम लगाने वाला। 

किसान जहां बसा, वहां जमीन के कुछ टुकड़ों पर फसल लेकर जैसे-तैसे जीवन यापन करता रहा। वर्षों से जिस माटी को वह सींचता आया, फसल उगाया, अपने पसीना बहाया, उस माटी का छिन जाने का डर सदैव ही उसके जेहन में बना रहा। कोरबा जिले के ग्रामीण शीतल कुमार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उसने अपनी खेती की भूमि पर वन अधिकार के लिये दावा करते वक््त सोचा था कि अब वह भी जमीन का मालिक बन जायेगा। शीतल की पूरी उम्मीद टूट गई। पत्नी को भी बहुत दुख हुआ। आवेदन जमा करने के बाद भी अपात्र हो जाने से शीतल के पास कोई रास्ता ही नही बचा था। अब तो उसे लगने लगा था कि वह जिस जमीन पर खेती कर रहा है वह न जाने कब छिन जाए, क्योंकि उसके पास जमीन के दस्तावेज भी नही थे। रूठे मन से खेती करते शीतल के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देश पर सभी निरस्त वन अधिकार पत्र के दावा आवेदनों कीे समीक्षा के निर्देश दिए गए। चूंकि शीतल का आवेदन भी निरस्त हुआ था। समीक्षा में नाम शामिल होने के साथ शीतल को सुकून तो मिला लेकिन पात्र होगा या फिर अपात्र यह सोचकर मन में संशय कायम था। आखिरकार जांच में शीतल पात्र हो गया है। अब लगभग चार एकड़ भूमि का मालिकाना हक के लिए आवेदन पात्र होने से पिता,माता और पत्नी, बच्चे सभी खुश है। 

किसान शीतल कुमार खुश है उन्हें अपनी मेहनत का लाभ फसल के साथ तो मिलेगा ही, जीवन यापन का स्थायित्व आधार भी मिल गया है। इसलिए पोड़ी उपरोडा़ विकासखंड के ग्राम गिद्धमुड़ी के किसान शीतल कुमार कहते हैं कि जिस भूमि पर खेती कर वे पसीना बहाते आये हैं, उसे छीने जाने का डर सदैव सताता था। उसने बताया कि भू अधिकार पट्टा के लिये आवेदन जमा किया था लेकिन उसे मालूम चला कि उसका आवेदन अपात्र की श्रेणी में है तो उसे बहुत दुःख पहुंचा।

अपात्र होने बाद एक तरह से यह भी डर समाया था कि कही खेती की जमीन वापिस तो नही ले ली जायेगी। अनुसूचित जनजाति वर्ग से आने वाले शीतल ने बताया कि वह अरहर, मूंग, उड़द,मूंगफली और धान की फसल लेता है। इसी से उसका जीवनयापन चलता है। किसान शीतल कुमार के पिता लगभग 70 वर्षीय शांत कुमार का कहना है कि बेटे को जमीन का वन अधिकार पट्टा के लिये पात्र की श्रेणी में आने पर खुशी हुई। अब भूमि से अपनापन बढ़ने के साथ भविष्य को लेकर बनी चिंताएं खत्म हो गई है। 

इधर कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल के निर्देश पर किसानों को भू-अधिकार पट्टे के साथ किसान क्रेडिट कार्ड एवं खेती के लिए खाद-बीज भी देने की तैयारी है। राजस्व विभाग द्वारा पट्टा दिए जाने से किसान भी भविष्य को लेकर आशान्वित होने लगे हैं कि उन्हें अब कोई बेदखल नहीं करेगा। किसान शीतल कुमार का कहना है कि शासन प्रशासन का यह कदम बेहद सराहनीय है। अब जीवन यापन में आसानी होगी। छत्तीसगढ़ की सरकार ने किसान हितैषी निर्णय लेकर भूमिहीन किसानों को जीवन यापन का नया आधार प्रदान किया है यह प्रशंसनीय है।

पुनर्विचार में चार हजार से अधिक पात्र
 वन अधिकार अधिनियम अंतर्गत प्राप्त निरस्त आवेदनों की समीक्षा उपरांत अभी तक चार हजार 190 आवेदन पात्र पाये गये है। जबकि पाच हजार 642 नवीन दावा भी स्वीकार हुये है। इस तरह से जिले में नौ हजार 832 नये वन अधिकार दावा पात्रता की श्रेणी में है। जबकि 42 हजार 093 वन अधिकार पत्र के पुराने स्वीकृत दावे हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here